योजना का तंत्र
व्यक्ति संभावित चालों का मानसिक अनुकरण करके देखता है कि कौन-सी अवस्था लक्ष्य के करीब ले जाएगी और कौन-सी बाद में बाधा बनेगी। कार्यशील स्मृति चुने हुए क्रम और अधूरे उपलक्ष्यों को सक्रिय रखती है, जबकि प्रतिक्रिया नियंत्रण तुरंत उपलब्ध लेकिन अनुपयोगी चाल को रोकता है। कठिन समस्या में सभी रास्ते देखना संभव नहीं होता, इसलिए उपयोगी उपलक्ष्य खोज क्षेत्र को छोटा करते हैं। खराब प्रदर्शन केवल कम स्मृति से नहीं, नियम की गलत समझ, जल्दबाजी या अनुपयोगी खोज रणनीति से भी आ सकता है।
योजना की गुणवत्ता कैसे मापें
ज्ञात न्यूनतम समाधान से अधिक चली गई चालें, नियम उल्लंघन, सफल समस्याओं का अनुपात, पहली चाल से पहले का समय और कुल पूर्णता समय अलग दर्ज करें। पहली चाल से पहले अधिक समय तभी बेहतर योजना का संकेत है जब बाद में अतिरिक्त चालें और वापसी घटें; अकेली देरी भ्रम भी दिखा सकती है। तुलना के लिए समान न्यूनतम चालों, समान आरंभिक अवस्था और समान नियम वाले नए प्रश्न दें। बार-बार वही समस्या देने पर व्यक्ति योजना के बजाय तैयार क्रम याद कर सकता है, इसलिए पहली कोशिश और पुनःप्रयास के परिणाम अलग रखें।
अभ्यास की उपयोगी शर्तें
- पहली चाल से पहले वर्तमान अवस्था, अंतिम लक्ष्य और कम से कम दो संभावित अगले रास्ते पहचानें। हर रास्ते में यह जाँचें कि कोई जरूरी वस्तु अस्थायी रूप से गलत दिशा में ले जानी पड़ेगी या नहीं।
- विफलता के बाद केवल सही चालों का क्रम न देखें। वह उपलक्ष्य खोजें जिसने रास्ता बंद किया, फिर बदली हुई आरंभिक अवस्था वाले प्रश्न पर वही सिद्धांत लागू करें।
- न्यूनतम आवश्यक चालों और आगे देखने की गहराई को धीरे बढ़ाएँ, जबकि नियम तथा नियंत्रण स्थिर रखें। स्थानांतरण जाँचने के लिए अभ्यास में न आए नए विन्यास सुरक्षित रखें।
निष्कर्ष की सीमा
टॉवर कार्य स्पष्ट नियम, पूर्ण जानकारी और एक सही लक्ष्य वाले वातावरण की क्रमबद्ध योजना मापता है। वास्तविक पढ़ाई, व्यवसाय या दैनिक जीवन में लक्ष्य बदल सकते हैं, जानकारी अधूरी हो सकती है और दूसरे लोगों की प्रतिक्रिया योजना को प्रभावित कर सकती है। इसलिए कम अतिरिक्त चालों से जीवन की समग्र योजना क्षमता में समान सुधार सिद्ध नहीं होता। अधिक मजबूत निष्कर्ष के लिए नए विन्यास, अलग सतही रूप और कुछ अनिश्चितता वाले स्वतंत्र कार्यों पर प्रदर्शन देखना चाहिए।