यह कैसे काम करता है
हर सफल पुनःस्मरण लक्ष्य जानकारी और उपलब्ध संकेतों के संबंध को फिर सक्रिय करता है। गलत उत्तर के बाद सही प्रतिक्रिया मिलने पर भ्रमित संबंध भी सुधारे जा सकते हैं। बहुत छोटा अंतराल उत्तर को सक्रिय अवस्था में रखता है, इसलिए अगली कोशिश वास्तविक स्मरण के बजाय उसी उत्तर की पुनरावृत्ति बन सकती है। बहुत लंबा अंतराल लगातार विफलता पैदा कर सकता है। उपयोगी कठिनाई वह है जिसमें उत्तर तुरंत न मिले, फिर भी उचित प्रयास या छोटे संकेत के बाद निकाला जा सके।
क्या और कैसे मापना चाहिए
मुख्य परिणाम अभ्यास के समय का अंक नहीं, बल्कि तय विलंब के बाद बिना उत्तर दिखाए सही स्मरण है। सही उत्तरों का प्रतिशत, स्मरण में लगा समय, आवश्यक संकेतों की संख्या, गलती का प्रकार और दोबारा सीखने में लगे प्रयास अलग दर्ज करें। लगातार और अंतराल वाले अभ्यास की तुलना में सामग्री, कुल अध्ययन समय, पुनःस्मरण की संख्या और अंतिम जाँच तक का समय समान होना चाहिए। तुरंत हुई जाँच और कई दिन बाद हुई जाँच अलग निष्कर्ष दे सकती हैं, इसलिए दोनों को मिलाकर एक अंक न बनाएँ।
अभ्यास की उपयोगी शर्तें
- पहले सामग्री का अर्थ समझें, फिर उत्तर ढककर उसे पूरा बनाने की कोशिश करें। उत्तर देखने से पहले अपना अनुमान और भरोसे का स्तर दर्ज करना पहचान के भ्रम को कम करता है।
- सही उत्तर मिलने पर अगला अंतराल धीरे बढ़ाएँ। गलत उत्तर या बार-बार संकेत की जरूरत होने पर अंतराल छोटा करें, पर उसी क्षण कई आसान पुनरावृत्तियाँ करके सफलता को कृत्रिम रूप से न बढ़ाएँ।
- हर उत्तर के बाद स्पष्ट सुधार दें और गलत हिस्से का कारण समझाएँ। कठिन सामग्री को पुराने तथा नए प्रश्नों के बीच मिलाकर रखें, ताकि क्रम याद करने के बजाय सही संकेत से उत्तर निकले।
निष्कर्ष की सीमा
सुधार मुख्यतः अभ्यास की गई सामग्री और उससे मिलते संकेतों पर दिखाई देता है। शब्दों की सूची याद रखने में बढ़त से सामान्य स्मृति, किसी दूसरे विषय की समझ या बिना अभ्यास वाले काम में समान बढ़त सिद्ध नहीं होती। उपयोगी अंतराल सामग्री की कठिनाई, पहले से मौजूद ज्ञान और स्मरण बनाए रखने की इच्छित अवधि पर निर्भर करता है। लगातार अभ्यास तुरंत बेहतर लग सकता है, जबकि अंतराल का लाभ देर से हुई जाँच में दिखे; इसलिए निष्कर्ष समान विलंब और नई प्रश्न-सामग्री पर आधारित होना चाहिए।